इंदौर के चप्पन दुकान में गैस संकट; पीएनजी और इंडक्शन को अपनाया

इंदौर के खूबसूरत खाद्य रत्न चापन दुकान, जिसे स्थानीय लोग 56 दुकान जानते हैं, ने अपनी किस्मत बदलने का रास्ता निकाल लिया है। मध्य प्रदेश की इस धर्मशाला जैसी जगह पर अब गैस सिलेंडरों की नहीं बल्कि नली वाली गैस (PNG) और बिजली के इंडक्शन कुकरों की चमक देखने को मिल रही है। 23 मार्च, 2026 की तारीख से ही यहाँ व्यापारियों ने ये कदम उठाए क्योंकि देशभर में मध्य पूर्वी तनावों की वजह से वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बंद हो गई थी।

संस्था ने किया सहयोग

यहाँ की व्यवस्था कर रहा 56 Dukan Association लगातार व्यापारियों के साथ जुदाता से काम ले रहा था। इस संस्था के अध्यक्ष गुंजन जोशी, अध्यक्ष, बताते हैं कि जब अवंतिक गैस कंपनी ने पहल की, तो उन्हें समझ में आ गया कि यह विकल्प स्थायी है। हालाँकि, पहले कुछ डर थे—क्या फ्लेम ठीक रहेगा? क्या दबाव पर्याप्त होगा? लेकिन जैसे ही पाइपलाईन के टेस्ट हुए, पंद्रह से अधिक दुकानदारों ने कनेक्शन ले लिए। यह कोई छोटी बात नहीं है, क्योंकि इनके पास गैस स्टॉक सिर्फ दो दिन के लिए काफी था।

बिजली और ऊर्जा का मैच

लेकिन रुकिए, यहाँ तक तो कहानी पूरी नहीं हुई। गैस कंपनी के नाली वाली लाइन के अलावा, कई दुकानदारों ने भारी इंडस्ट्रियल ग्रेड इंडक्शन कुकर भी खरीदे। ऐसा इसलिए क्योंकि बिजली जाने पर गैस वाला स्टोव फंस सकता था। अब पoha, दोसा, समोसे और पावभाजी सब इंडक्शन पर बन रहे हैं। शुरुआत में थोड़ा सा झिंक लगा, स्वाद बराबर रहता या नहीं, यह देखना मुश्किल था। लेकिन आज तो व्यापारी खुद कह रहे हैं कि अनुकूलन हो चुका है। गुंजन जोशी ने कहा, "हमें हमारे स्वाद और विरासत का भरोसा बना रखना है, चाहे रसोई का तरीका बदलता हुआ रहे।" अवंतिक गैस कंपनी ने पाइपलाईन पहले से ही इस क्षेत्र के पास से गुजरने दी थी, इसलिए कनेक्शन लेने में बहुत दिक्कत नहीं हुई।

छोटे विक्रेताओं की चिंता

छोटे विक्रेताओं की चिंता

लेकिन बात सिर्फ चप्पन दुकान तक सीमित नहीं है। इंदौर इंदौर के छोटे दबाह वाले और छोटे ठेकेदार, जिनके पास महंगे इंडक्शन कुकर खरीदने के पैसा नहीं था, वे लौट गए। वो फिर से कोयला और लकड़ी वाले चूल्हों पर लौट आए हैं। यह एक बड़ी समस्या है, क्योंकि इससे हवा की गुणवत्ता खराब होगी। सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि घरेलू गैस की किल्लत नहीं है, लेकिन उसकी बुकिंग में अब 25 दिन का समय लगता है। अगर किसी ने घर का सिलेंडर दुकान में इस्तेमाल किया, तो उसे जब्त कर दिया जाएगा।

इसके अलावा, सराफा बाजार में जोड़ाकारियां भी प्रभावित हुईं, जहाँ गैस हीटरिंग का इस्तेमाल होता है।

भविष्य की योजनाएँ और सौर ऊर्जा

यहाँ सबसे दिलचस्प बात यह है कि असोसिएशन के पास एक दूसरा कार्ड है। उन्होंने सोलर पैनल लगाने की योजना बनाई है ताकि इंडक्शन कुकर बिजली के बिलों पर निर्भर न रहें। अगर गैस संकट बढ़ गया, तो कुछ विशेष डिशेज जो पारंपरिक गैस स्टोव पर बनीं होती हैं, उन्हें मेनू से हटाना पड़ सकता है। फिर भी, उनका मकसद साफ़ है—इंदौर की पहचान बरकरार रखना।

मुख्य तथ्य

मुख्य तथ्य

  • चापन दुकान में अब 15 से ज्यादा दुकानें पीएनजी पर चल रही हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय तनावों ने मार्च 2026 में व्यावसायिक गैस आपूर्ति को प्रभावित किया।
  • घरेलू गैस बुकिंग में 25 दिन का इंतज़ार है।
  • छोटे विक्रेता प्रदूषण बढ़ाने वाले कोयले का उपयोग कर रहे हैं।
  • असोसिएशन भविष्य में सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भर बनना चाहता है।

Frequently Asked Questions

चप्पन दुकान पर गैस किल्लत क्यों हुई?

मध्य पूर्वी देशों में राजनीतिक तनावों ने वैश्विक गैस आपूर्ति को प्रभावित किया, जिससे भारत में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति मार्च 2026 में प्रभावित हुई। परिणामस्वरूप, दुकानदारों ने वैकल्पिक स्रोतों को अपनाना बेहतर समझा।

क्या पीएनजी कनेक्शन सभी दुकानदारों के लिए उपलब्ध है?

हां, अवंतिक गैस कंपनी ने पाइपलाईन को पहले से ही चप्पन दुकान क्षेत्र में बिछा दिया था, जिससे कनेक्शन लेना आसान हो गया। हालांकि, कुछ छोटे विक्रेता अपने बजट की वजह से इसका लाभ उठा नहीं पाए।

इंडक्शन कुकर का उपयोग करने पर स्वाद बदलेगा?

अवश्य ही शुरू में कुछ चुनौतियाँ थीं, लेकिन अधिकांश व्यापारियों ने इंडक्शन तकनीकों को अपनाया है। संस्थान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद बरकरार रहे, भले ही पकाने का माध्यम बदल गया हो।

छोटे विक्रेताओं के लिए क्या विकल्प हैं?

सरकारी ने रेडीओ, इन्फ्रारेड या बायोफ्यूल का उपयोग करने की सलाह दी है। लेकिन वर्तमान में कई छोटे ठेकेदार कोयला या लकड़ी पर लौट गए हैं, जो शहर के वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।