डिविडेंड: क्या है और आपको क्यों देखना चाहिए

डिविडेंड कंपनी का लाभ शेयरहोल्डर्स को बांटने का तरीका है। अगर आपने किसी कंपनी के शेयर खरीदे हैं और कंपनी ने लाभांश घोषित किया है, तो आपको हर शेयर के बदले पैसा या और शेयर मिल सकता है। यह नियमित इनकम चाहने वाले निवेशकों के लिए खास होता है।

किसी कंपनी का डिविडेंड स्थिर नहीं रहता — कंपनी की मुनाफाखोरी, कैश फ्लो और ग्रोथ जरूरतों पर निर्भर करता है। बड़े और अच्छी कमाई करने वाले कंपनियाँ अक्सर नियमित डिविडेंड देती हैं, जबकि तेज़ी से बढ़ रही कंपनियाँ मुनाफे को फिर से निवेश कर सकती हैं।

डिविडेंड के प्रकार और तारीखें

मुख्य रूप से तीन तरह के डिविडेंड होते हैं: फाइनल (वार्षिक रिपोर्ट के साथ), इंटरिम (वर्ष के बीच घोषित) और स्पेशल (एक बार का)। हर डिविडेंड के साथ कुछ तारीखें जुड़ी होती हैं — घोषणा तिथि (declaration date), रिकॉर्ड तिथि (record date) और भुगतान/पेपआउट तिथि। अगर आप रिकॉर्ड तारीख तक कंपनी के शेयर धारक होते हैं, तो आप डिविडेंड के हकदार बनते हैं।

एक और अहम शब्द है ex-dividend date: इस तारीख पर या उसके बाद खरीदने वाले को उस घोषणा का लाभ नहीं मिलता। इसलिए खरीदने से पहले इन तारीखों को ज़रूर देखें।

डिविडेंड यील्ड, पेर शेयर कैलकुलेशन और टैक्स

डिविडेंड यील्ड जानने का आसान तरीका: (वार्षिक डिविडेंड प्रति शेयर ÷ शेयर की मौजूदा कीमत)×100। उदाहरण: अगर कंपनी साल में कुल ₹5 प्रति शेयर देती है और शेयर की कीमत ₹200 है, तो यील्ड = (5/200)×100 = 2.5%। यह दिखाता है कि आपके निवेश पर नकद रिटर्न कितना आया।

भारत में 2020 के बाद कंपनी पर Dividend Distribution Tax नहीं लगता; अब डिविडेंड प्राप्त करने वाले निवेशक इसे अपनी आय में दिखाते हैं और अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स भरते हैं। साथ ही कंपनियाँ कुछ सीमाओं से ऊपर डिविडेंड पर TDS काटती हैं (उदाहरण के लिए एक थ्रेसहोल्ड पर)। इसलिए डिविडेंड से मिलने वाली रकम और कर कटौती दोनों ध्यान में रखें।

निवेश के समय कुछ बातें जरूर देखें: कंपनी का पेर-शेयर डिविडेंड स्थिर है या घटता-बढ़ता रहता है, पेरआउट रेशियो (कितना प्रतिशत मुनाफे का बांटते हैं), कंपनी का कैश फ्लो और भविष्य की ग्रोथ प्लान। सिर्फ ऊंचा यील्ड देखकर खोई हुई कंपनी में पैसा डालना रिस्की हो सकता है — कभी-कभी ऊँचा यील्ड कंपनी के गिरते शेयर की वजह से भी दिखता है।

डिविडेंड पुनर्निवेश योजनाएँ (DRIP) कुछ कंपनियाँ देती हैं — इसमें आप नकद लेने के बजाय नए शेयर ले सकते हैं, जिससे कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। लंबी अवधि के निवेशक के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है।

कहानी छोटी: डिविडेंड नियमित आय और पोर्टफोलियो संतुलन का अच्छा तरीका है, लेकिन केवल डिविडेंड पर अटकने की बजाय कंपनी की फंडामेंटल्स, पेरआउट रेशियो और टैक्स असर को समझकर निर्णय लें। शेयर खरीदने से पहले कंपनी की घोषणाएँ (BSE/NSE/कंपनी वेबसाइट) और रिकॉर्ड/Ex-dividend तारीखें चेक कर लें।