घरेलू हिंसा मामला: क्या करें और किससे मदद लें

अगर आप या आपका कोई जानने वाला घरेलू हिंसा का सामना कर रहा है तो सबसे पहले सुरक्षित रहना जरूरी है। डर लगे तो तुरंत किसी विश्वसनीय रिश्तेदार, पड़ोसी या दोस्त के पास जाएँ। अकेले खतरनाक स्थिति में 112 पर एक्सीडेंटल कॉल या 181 (राष्ट्रीय महिला हेल्पलाइन) पर संपर्क करें।

क्या करें: तुरंत कदम

1) अपनी सुरक्षा पहले रखें। अगर बात बढ़ने वाली हो तो घर से सुरक्षित जगह पर चले जाएँ।

2) फोन से मदद मांगें — 112 या 181 पर कॉल करें। महिला पुलिस थाने या महिला हेल्पडेस्क से भी संपर्क कर सकते हैं।

3) चोट लगने पर नज़दीकी अस्पताल जाकर मेडिकल रिपोर्ट (एमआरपी) बनवाएँ। यह रिपोर्ट बाद में सबूत के रूप में काम आती है।

4) सबूत सुरक्षित रखें — मोबाइल के मैसेज, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो, बैंक स्टेटमेंट और गवाहों के नाम। ये सब पुलिस और अदालत में मदद करेंगे।

कानूनी अधिकार और मदद के रास्ते

भारत में पीड़ितों के पास कई कानूनी विकल्प हैं। घरेलू हिंसा के लिए Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 (DV Act) के तहत आप सुरक्षा आदेश, वापसी अधिकार, मुआवजा और अस्थायी राहत मांग सकते हैं। साथ ही, पति/ससुराल द्वारा क्रूरता पर IPC की धारा 498A लागू हो सकती है।

FIR दर्ज करने के लिए नज़दीकी पुलिस स्टेशन जाएँ या महिला थाने में रिपोर्ट करें। अगर पुलिस में परेशानी हो तो राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authority) या NALSA से मुफ्त कानूनी मदद लें।

अगर घर छोड़ना हो तो शेल्टर होम/सुरक्षित गृह की जानकारी स्थानीय महिला और बाल विकास कार्यालय या NGOs से मिलती है। कई एनजीओ तत्काल सहायता, काउंसलिंग और कानूनी सपोर्ट देते हैं।

अगले कदम के लिए कुछ सरल सलाह:

- किसी भी धमकी का स्क्रीनशॉट, रेकॉर्डिंग और तारीख‑समेत नोट बनाकर रखें।

- बैंक-पासबुक, नौकरी के दस्तावेज और पहचान-पत्र का एक कॉपी सुरक्षित जगह पर रखें या किसी भरोसेमंद के पास छोड़ दें।

- बच्चो की सुरक्षा में फौरन ध्यान दें। जरूरत पड़ी तो जज से कस्टडी या देखभाल के अस्थायी आदेश मांगे जा सकते हैं।

अगर आप गवाह हैं या पड़ोसी तो क्या करें? पहले पीड़ित की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। सीधे सामना करने के बजाय मदद बुलाएँ, पुलिस या हेल्पलाइन को फोन करें और घटनाक्रम का संक्षिप्त रिकॉर्ड बनवा लें। पीड़ित की सहमति के बिना निजी जानकारी सोशल मीडिया पर न फैलाएँ।

अंत में, याद रखें—आप अकेले नहीं हैं। सहायता के लिए 112 और 181 जैसे नंबर और राज्य के महिला थाने, NALSA व स्थानीय NGOs मौजूद हैं। जल्दी कार्रवाई और सही दस्तावेज पीड़ित की सुरक्षा और जीत दोनों में बड़ा फर्क लाते हैं।