निपाह वायरस — क्या है और किन признаकों पर सतर्क रहें

निपाह वायरस एक गंभीर रोग है जो अक्सर तेज बुखार, सिरदर्द और सांस लेने में दिक्कत से शुरू होता है। कुछ मामलों में तेज उल्टी, भ्रम या कोमा भी देखा गया है। बीमारी का शुरुआती दौर सामान्य वायरल फीवर जैसा लग सकता है, इसलिए जल्दी पहचान जरूरी है।

कैसे फैलता है निपाह?

यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले पंख वाले चमगादड़ों (fruit bats) में मिलता है। संक्रमित चमगादड़ों के मूत्र, लार या फलों पर गिरने वाले द्रव से मनुष्य संक्रमित हो सकता है — उदाहरण के लिए कच्चे खजूर के रस या गिरे हुए फल के जरिए। इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात: संक्रमित व्यक्ति से सीधे नज़दीकी संपर्क (छींक, खांसी, शरीर के द्रव) से मानव-से-मानव संक्रमण हो सकता है।

क्या जानना ज़रूरी है? इंफेक्शन का इनक्युबेशन पीरियड आमतौर पर 4-14 दिन होता है। गंभीर मामलों में मृत्यु दर काफी उच्च हो सकती है, इसलिए हल्के लक्षण को भी नज़रअंदाज़ न करें।

लक्षण और किसे आपात मानें

आरम्भिक लक्षण: तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, मतली।

जैसे-जैसे बढ़े: साँस लेने में कठिनाई, खाँसी, उल्टी, मानसिक भ्रम या बेहोशी। अगर 48 घंटे के अंदर तेज बुखार के साथ सांस की तकलीफ या चेतना में बदलाव हो, तो तुरंत अस्पताल जाएँ।

डायग्नोस्टिक टेस्ट के लिए डॉक्टर नमूना (रिनल/नासोफैरीन्जियल स्वैब, खून) भेजते हैं। आरटी-पीसीआर और एंटीबॉडी टेस्ट आम हैं।

इलाज: फिलहाल कोई विशेष, सार्वभौमिक इलाज या वैक्सीन आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में सहायक उपचार (IV फ्लूइड, ऑक्सीजन, ICU देखभाल) ही मुख्य मार्ग है। कुछ प्रयोगात्मक दवाएँ चल रही हैं पर वे सीमित केंद्रों तक हैं।

घरेलू और समुदायिक बचाव बेहद आसान हैं: कच्चे फल और रस को धुले बिना न खाएँ, especially जमी हुए फलों से दूर रहें; घर के आसपास चमगादड़ के आने वाले स्थान साफ रखें; संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से बचें।

क्या करना चाहिए अगर किसी में शक हो? उस व्यक्ति को अलग करें, उसके साथ सीधे संपर्क से बचें, मास्क पहनें, हाथ साबुन या सैनिटाइज़र से साफ करें और स्थानीय हेल्थलाइन/डॉक्टर को तुरंत बताएं। मृतक के शरीर के संपर्क में विशेष सावधानी रखें — स्थानीय स्वास्थ्य निर्देशों का पालन करें।

हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए: PPE, एयरबोर्न और संपर्क प्रीकॉशन्स, संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन जरूरी है।

निष्कर्ष की तरह नहीं — बस एक आख़िरी सलाह: तेज बुखार और साँस की तकलीफ को हल्के में मत लें। जल्दी पहचान और सही इलाज कई बार जान बचाता है। इलाकाई स्वास्थ्य प्रशासन की सूचनाओं पर ध्यान दें और अफ़वाहों से बचें।