मध्याप्रदेश की ग्रामीण जनता के लिए रोजगार का प्रतीक बन चुकी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) पर अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सामने आई रिपोर्ट्स बता रही हैं कि सरकारी मोबाइल ऐप का 'क्लोन' (नकली संस्करण) बनाकर मजदूरों की फर्जी हाजिरी दर्ज की गई और इसमें लगभग ₹200 करोड़ तक के गबन की आशंका जताई गई है। यह मामला सिर्फ एक तकनीकी खामोशी नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित धोखे की कहानी है, जहां डिजिटल सुविधाओं को ही भ्रष्टाचार का हथियार बना दिया गया।
यह खबर तब सामने आई जब Vistaar News ने अपनी विशेष रिपोर्ट में इसे "महाफर्जीवाड़ा" कहा। लेकिन वास्तविकता थोड़ी और अलग है। बात सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि उस तकनीक की है जिसे हम सुरक्षित मानते थे। क्या आपने कभी सोचा था कि जो ऐप आपके काम की पुष्टि करता है, वही आपको बेरोजगार कर सकता है? यही हुआ मध्य प्रदेश में।
क्लोन ऐप: डिजिटल दुनिया का नया चोर?
आइए बात करते हैं कि यह सब कैसे हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, मनरेगा में हाजिरी लगाने वाले सरकारी ऐप, जिसे आम भाषा में NMMS ऐप कहा जाता है, का एक नकली वर्जन तैयार किया गया। यह कोई साधारण कॉपी नहीं थी; यह एक ऐसा टूल था जो सरकारी सर्वर को यह विश्वास दिला सकता था कि मजदूर मौजूद हैं, जबकि वे कहीं और थे।
यहाँ एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। 'भास्कर इन्वेस्टिगेशन' से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि इस क्लोन ऐप को Telegram प्लेटफॉर्म पर मासिक ₹3,500 की सदस्यता पर बेचा जा रहा था। हाँ, आपने सही पढ़ा। भ्रष्टाचार अब एक 'सब्सक्रिप्शन मॉडल' पर चल रहा है। इसका मतलब है कि यह कोई एकाधिकार नहीं, बल्कि एक व्यापार था जिसमें कई लोग शामिल थे।
"मनरेगा में फर्जी हाजिरि लगाने के लिए NMMS ऐप का क्लोन वर्जन टेलीग्राम पर ₹3500 प्रतिमाह तक में बेचे जाने का दावा।" - भास्कर इन्वेस्टिगेशन
केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं
अक्सर我们认为 कि घोटाले अलग-अलग होते हैं, लेकिन डेटा कहता है कि यह एक पैटर्न है। मध्य प्रदेश के बाद, राजस्थान में भी मनरेगा की डिजिटल निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। वहां भी क्लोन ऐप के जरिए फर्जी हाजिरी लगने की शिकायतें मिली हैं।
उत्तर प्रदेश का इतिहास भी इसका सबूत है। 2017 में गोंडा जिले में मनरेगा घोटाले की CBI जांच हुई थी, जहां अफसरों और ठेकेदारों ने मिलकर करोड़ों रुपये की लूटपाट की थी। वहीं, जौनपुर में पिछले 16 महीनों में ₹42 लाख के गबन का खुलासा हुआ, जहां ग्राम प्रधान और सचिवों पर आरोप लगे। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में तो मामला और भी गंभीर था—7 पंचायतों में फर्जी नामों से जॉब कार्ड बनकर 2 साल में ₹20 करोड़ निकाल लिए गए, जबकि वहां के मतदाताओं की संख्या मजदूरों से कम थी।
जनता की मांग: अब क्या होगा?
सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा देखने लायक है। Facebook और Instagram पर चल रहे अभियानों में तीन मुख्य मांगें हैं:
- CBI जांच: स्थानीय अधिकारियों पर भरोसा टूट चुका है, इसलिए स्वतंत्र एजेंसी की जांच की मांग तेज है।
- पैसे की वापसी: छिनए गए ₹200 करोड़ को वापस लेने की सख्त मांग।
- पारदर्शिता: मनरेगा में AI आधारित फोटो सिस्टम जैसे नए उपायों की तुरंत लागू करने की अपील।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी संकेत मिलता है कि 30 जून 2026 के बाद मनरेगा योजना में बड़े बदलाव आएंगे और पुरानी व्यवस्था बंद हो सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
Frequently Asked Questions
क्लोन ऐप क्या है और यह मनरेगा में कैसे काम करता है?
क्लोन ऐप वह नकली मोबाइल एप्लीकेशन है जो सरकारी NMMS ऐप की तरह दिखता है लेकिन बैकएंड में फर्जी डेटा भेजता है। इसका उपयोग करके बिना मजदूरों की मौजूदगी के उनकी हाजिरी दर्ज की जाती है, जिससे उन्हें अवैध रूप से वेतन दिया जाता है और सरकार का धन चोरी होता है।
मध्य प्रदेश में मनरेगा घोटाले की कुल राशि कितनी अनुमानित है?
विस्तार न्यूज़ और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कथित डिजिटल घोटाले में लगभग ₹200 करोड़ तक के गबन की आशंका जताई गई है। यह राशि उन सभी फर्जी हाजिरियों का योग है जो क्लोन ऐप के माध्यम से दर्ज की गईं।
क्या इस मामले में CBI जांच की मांग की गई है?
हाँ, सोशल मीडिया अभियानों और विपक्षी दलों द्वारा इस मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए CBI (केंद्रीय अनुसंधान ब्यूरो) की जांच की तीव्र मांग की जा रही है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के गहरे जाल की आशंका है।
क्या अन्य राज्यों में भी ऐसे घोटाले सामने आए हैं?
हाँ, उत्तर प्रदेश के गोंडा और जौनपुर, मध्य प्रदेश के मुरैना और राजस्थान में भी मनरेगा या संबंधित योजनाओं में फर्जीवाड़े और गबन के मामले सामने आए हैं। यह दर्शाता है कि यह समस्या क्षेत्रीय नहीं, बल्कि प्रणालीगत है।
30 जून 2026 के बाद मनरेगा में क्या बदलाव आ सकते हैं?
कुछ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया संकेतों के अनुसार, 30 जून 2026 के बाद मनरेगा योजना में संरचनात्मक बदलाव किए जा सकते हैं और पुरानी कार्यप्रणाली बंद हो सकती है। इसके साथ ही AI आधारित निगरानी जैसे नए तकनीकी उपाय लागू होने की उम्मीद है।